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कहाँ है तू ..... ऐ ज़िंदगी

         
     
           महकती थी बहकती थी पर ना जाने क्यूँ कुछ दिनों से ऐसा लगता है कि जैसे कहीं ठहर सी  गई है ज़िंदगी .... न जाने कहाँ जाकर ठहर गई है ....  कुछ पता नहीं 😥   ..... कुछ कहकर नहीं गई , कब आयेगी  ये बताकर भी नहीं गई . इतने दिनों से चलते हुए शायद थक गई होगी थोड़ा ..... इसीलिए ठहर गई होगी . पर अब तो आ जाना चाहिए था उसको अब तो दिन बहुत हो गये अब तो ख़ुद की साँसे भी डराने लगी हैं मुझे .
      सम्भालती हूँ ख़ुद को बहुत मगर मन की आशा और निराश होती चली जा रही है . मेरे आँगन की देहलीज पर फ़फ़कता  हुआ दीपक मुझे और बेचैन कर रहा है.  उसकी फ़फ़कती हुई लौ ऐसे बार-बार डराती है मुझको कि मुझे बस ऐसा प्रतीत होने लगता है जैसे ज़िंदगी चली आ रही हो और मैं इतनी सी उम्मीद को पाकर हर बार ख़ुशी की आँधियों में उड़ने लगती हूँ मगर अफ़सोस .... वो ख़ुशी की आँधी बस कुछ ही क्षणों की मेहमान होती है .
मैं सोचती हूँ सम्भाल लूँ ख़ुद को मगर मन जो है न मेरा मुझे चैन से सोने नहीं देता , मेरी बिखरती हुई उम्मीदों को हौसलों का ज़ामा पहनाकर मुझे अपने आगोश में कर लेता है .



       मुझे नाराजगी तो तुझसे बहुत हैं ज़िंदगी  .....पर तू पहले सामने आ मेरे  .... और आकर बात कर मुझसे फिर मैं बताती हूँ तुझे . एक ही पल में कितना उदास कर दिया है तूने मुझको 😢 मेरे बुने हुए सपनों के हर रंग को तू चुराकर ले गई है अपने साथ ....
   मैं तुझसे ही कह रही हूँ तू सुन तो रही है न मेरी बात ..... ?  अरे ! तू सुनेगी कैसे तू यहाँ पर होगी तब न सुनेगी तू मेरी बात ... न जाने कहाँ जाकर ठहर गई है ये ज़िंदगी  .
      
      मेरे घर के दरवाज़ों से आने वाली वो हवा भी मुझे इस तपिश भरी रातों में शीत सी चुभ रही है .... मैं उन  दरवाज़ों को बंद भी करूँ तो कैसे वही तो एक तेरे आने की राह है .... पर तेरा क्या है आज इधर ख़ुश कल उधर ख़ुश , मंडराती रहती है बस भँवरों की तरह .... पर मेरी तो फ़िक्र किया कर , कितनी अकेली हो गई हूँ मैं तेरे बगैर .... पर तुझे क्या .... तुझे मेरी कोई फ़िक्र हो तब ना .... तुझे कुछ सिखाया नहीं तेरे माँ बाप ने ? क्यूँ रुलाती है तू मुझको इतना ? अब है कोई जवाब तेरे पास ?
      अरे बताएगी कैसे .... जब तू यहाँ होगी न मेरे पास ..... न जाने कहाँ जाकर ठहर गई है ये ज़िंदगी .
            अरे आ जा ज़िंदगी  ..... अब बहुत ठहर ली अब चलने का वक़्त शुरू हो गया है अब लौटकर आ जा मेरे पास ... फिर एक दिन तो तुझे भी चले ही जाना है मेरे साथ .... जितने दिन साथ है उतने दिन तो मेरा साथ दे दे .           आज के बाद तुझे कहीं भी जाकर ठहरने की कोई ज़रूरत नहीं  है ..... तू आ पहले , आने के बाद तुझसे हर एक आँसू का हिसाब लूँगी मैं , जो तेरे इस बेरहम दिल ने मेरे नाज़ुक से मन को  मायूस किया है .

   
      ठहरेगी तो तू तभी जब मैं ठहर जाऊँगी , जब तक मेरी साँस है तू बिना थके चलती रहे ऐ ज़िंदगी  .... बोल करेगी न तू ऐसा ?

                      तू चलती रहे ज़िंदगी 
                      महकती रहे ज़िंदगी 
                      मैं भी तो चल रही हूँ न साथ तेरे
                      बस इतना सा सोचकर 
                      तू हँसती रहे ज़िंदगी ।।
           

Comments

  1. बहुत ही शानदार वान्या कुछ दमदार शब्दों से इस ज़िन्दगी को बखूबी बयां किया तुमने । ऐ मेरी ज़िंदगी कहाँ है तू बहुत तुने हैं नखरे दिखाए अब तो चली आ चली आ

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  2. bahot khubsurati se bayan ki h dil ki baat

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