सुनों !! क्या तुम्हें मेरे आने का ज़रा सा भी एहसास नहीं हुआ क्या मेरे क़दमों की आहट ने तुम्हें और बेचैन नहीं किया, तुम्हें कुछ तो महसूस हुआ होगा कि मैं यहीं हूँ तेरे पास .... तेरे शहर में ....
मैं यहीं तो हूँ तेरे पास तेरे शहर में मगर इन नज़रों ने कभी तुझे देखा नहीं इन तरसती आँखों ने तुमको ढूँढा तो बहुत मगर तुम्हारी वो एक प्यारी सी मनमोहक झलक मुझको दिखी नहीं तुम्हारी तस्वीर बसी है मन में मेरे .... मगर मैं तो तेरा दीदार चाहता हूँ तेरे इस प्यार भरे दिल से कुछ अल्फाज़ माँगता हूँ तू मुझे न सही किसी और को समझकर सामने आ जाये मेरे बस इतना सा ख़्वाब है मेरा कि मैं यहीं हूँ तेरे शहर में .....
मेरे पास से गुज़रने वाली उस हवा में मुझे तेरी ही खुशबू आती है मेरा ख्याल तो ये है कि कहीं तू हवा कि वो नर्म सी परत बनकर मुझे ढके तो नहीं है क्यूँकि मैं भी तो हूँ उसी शहर में जो हवा तुझे छूकर गुज़रती है ....
सुनो !! कब दीदार होगा तुम्हारा .... तड़प रहा हूँ तुमसे मिलने को तेरे ही शहर में ....
अपने मुख से निकले हुए हर अल्फाज़ को जरा महसूस करके बोलना ... मुझे सुनाई दे रही है तेरे मुख से निकली वो सुरीली सी आवाज़ क्यूँकि मैं यहीं हूँ तेरे करीब तेरे ही शहर में .......
अब जी नहीं लगता मेरा तेरे शहर में, क्यूँकि इस शहर में आने की यहाँ रहने की वजह तू ही थी लेकिन अब जब तेरा दीदार भी मुनासिब नहीं तो क्या रखा है इस शहर में मेरा.... अब सिर्फ यादें हैं और यादों का बोझ उठाना बहुत मुश्किल होता है ....
अब तो थकने लगा हूँ तेरे ही शहर में ढूँढकर तुझको .... सोचता हूँ अब नहीं होगा तेरा दीदार मुझको ..... चल दूँ मैं अब तेरे शहर से ... तभी वो दूर बैठा चाँद जो उन प्यार भरी निगाहों से तुझको देखता है और फ़िर मुझे देखकर मुस्कुराकर कहता है अरे रुको , मिल तो लो अपने दिलदार से उसको ये बता दो कि मैं इतने दिनों से यहीं था ....तेरे दीदार की चाहत में तड़प रहा था तेरे ही शहर में ....
सुन्दर अभिव्यक्ति
ReplyDeleteThanks vikas
DeleteNice and touching lines...Nice work keep it up
ReplyDeleteThanks akki
Delete👌👌👌👌
ReplyDeleteलिखती रहो शुभकामनायें
ReplyDeleteशुक्रिया सर
DeleteBàhot sundar.Padh kar achcha laga.
ReplyDeleteThanku ma'am
DeleteWaah! Bahut khoob
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