तेरा यूँ साथ चलना
तेरा यूँ मुस्कुराना
मेरे हर सुख़ दुख़ को अपना कहना
मुझे बहुत याद आता है
मेरे माथे पर पड़ी उन सिलवटों को देखकर
तेरा मुझसे कुछ पूछना
मेरे लाख मना करने पर भी
तेरा मेंरे मन को पढ़ लेना
अद्भुत था
कभी साथ चलते चलते
तेरा कुछ सोचना
फिर दूर जाकर बैठकर
तेरा मुझसे कुछ पूछना
आज भी सब याद है
कुछ नहीं भुला हूँ मैं
तेरे संग बिताये हुये
हर एक पल का हिसाब
लिखा है मेरे पास
कभी आओ तुम भी पढ़ो
तो शायद मैं भी पढ़ लूँ थोड़ा
तेरे बग़ैर दिल नहीं चाहता
उस डायरी को उठाने का
मुझे भीतर तक झकझोर देती हैं
तेरी वो यादें
तेरी वो बातें
सोचता हूँ कि हँसकर याद करूँ तुझे
मग़र न जाने क्यूँ
ये उदासी दूर जाती नहीं
न जाने कितना पसंद आ गया हूँ मैं इसको
कभी किसी छोटी सी बात पर
तेरा रोना
तेरी उस उदासी भरी शक़्ल में
तेरी मासूमियत छिपी होना
याद करता हूँ तो
एक मुस्कान लाने को मजबूर हो जाता हूँ
समझ नहीं आता
अब क्या करूँ इन यादों का
इन को हँसकर याद करूँ
या यूँ ही रोता रहूँ
टूट चुका हूँ मैं
मैं मैं नहीं रहा
कहाँ हो तुम
एक बार आओ तो सही
मेरा हाल न पूछना
दूर से ही मैं देख लूँगा तुम्हें
तुम मेरे अश्कों को मत पोंछना
मुझे अपनी एक मुस्कान दे देना
तेरी वो मुस्कान भरी सूरत देखकर
मैं फिर से जी उठूँगा
बोलो करोगी न तुम ऐसा ... ?
VanyA मेरी कलम से
एक दबी सी ख्वाइश का सुन्दर वर्णन....
ReplyDeleteशुक्रिया मैम
DeleteVery true line
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