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बेटी का ब्याह

 
     बेटी का ब्याह करने का सपना अपने मन में लिए हर माँ बाप जी रहा होता है. वही माँ बाप अपनी बेटी का ब्याह करने के बाद अपने आपको धन्य समझने लगता है क्यूंकि उनकी लाडो अब किसी और के घर की मालकिन बनने तथा किसी और का घर सम्भालने को तैयार होती है. यही सोंचकर माँ बाप भी अपनी बेटी को ख़ुशी ख़ुशी विदा कर देते हैं. 

 ठीक ही कहा गया है की -
 आंसूओं की एक बूँद सी होती हैं बेटियां
 दो दो कुलों के बोझ को ढोती हैं बेटियां
 बोये जाते हैं बेटे पर उग आती हैं बेटियां
 हीरा अगर है बेटा तो मोती है बेटियां




  आइये जनता हैं की एक बेटी का ब्याह किन रस्मों के साथ पूर्ण हो पाता है -

                                                           

                                              1- गोदभराई 
गोदभराई शादी से पहले की जाने वाली रस्मों में से एक रस्म होती है. इसमें लड़की की होने वाली सास अपनी बहू की गोद मेवे , मिष्ठान तथा गहने वस्त्रादि से भरती है. 

2- सगाई 
सगाई की रस्म भी शादी से पहले ही होती है. जिसमे लड़की और लड़का एक दुसरे को अंगूठी पहनाते हैं.

3- तिलक
तिलक की रस्म शादी होने के कुछ दिन पहले ही मनाई जाती है. जिसमे लड़की का भाई अपने होने वाले बहनोई को तिलक करता है तथा उनकी मांगानुसार नगद रुपये तथा अन्य सामग्री देता है.

4- मेहंदी 
मेहँदी लड़की की सुन्दरता में चार चाँद लगा देती है. ऐसा कहा जाता है की मेहँदी का रंग जितना गहरा चढ़ता है, पति पत्नी का प्यार उतना ही गहरा होता है .

5- द्वारचार 
जब दूल्हा बारात और बैंड बाजे के साथ अपनी दुल्हन को लेने आता है तो दरवाजे पर उसका स्वागत करना ही द्वारचार कहलाता है. 

6- जयमाल  
द्वारचार होने के बाद जयमाल की रस्म होती है जिसमे दूल्हा और दुल्हन एक दूसरे को फूलों की माला पहनाते हैं. 

7- कन्यादान 
  हिन्दू विवाह में कहा जाता है की कन्यादान सबसे बड़ा दान होता है. जिसमे माता पिता अपनी लड़की के पैर पूजकर कन्यादान कर देते हैं अर्थात अपनी लड़ी किसी और को सौंप देते है. 

8 - सात फेरे 
दूल्हा और दुल्हन ईश्वर को साछी मानकर अग्नि के चारों ओर घूमकर सात फेरे लेते हैं, और सात जन्मो के लिए एक दुसरे के पूरक बन जाते हैं.


9- कलेवा
कलेवा की रस्म शादी की सभी रस्मे संपन्न होने के बाद और विदाई की रस्म होने से पहले होती है. जिसमे दूल्हे को तिलक लगाकर कुछ उपहार दिया जाता है.  

10- विदाई 


सभी रस्मों में से विदाई की रस्म थोड़ी दुखद होती है क्यूंकि इसमें लड़की अपने बचपन का घर, अपने माँ बाप को छोड़कर एक नए घर में तथा नए लोगों के बीच चली जाती है जो उसकी ससुराल होती है.



सभी रस्में देखने के बाद आप समझ ही गये होंगे की एक बेटी का ब्याह किन रस्मों के साथ पूर्ण होता है. बेटियों के जाते ही घर में सन्नाटा सा छा जाता है मगर वही दूसरी ओर उस घर में खुशियाँ ही खुशियाँ आ जाती हैं जहाँ या बेटियां बहू बनकर जाती हैं. 




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