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Blessings for my sister ....

               रंग जाओ अब उनके रंग में
                   प्रीत भरे इस जीवन में
               जीवन की लहरों में छुपकर
                    घूँघट के उस आँचल में
               आँचल की खुश्बू में छुपकर
                    रंग जाओ तुम दर्पण में
               दर्पण के भीतर प्यारी सी
                     झिलमिल झिलमिल सी आँखों में
               आँखों के काजल से रंग लो
                     या रंग लो उनके मन से खुद को
                फूलों कलियों सा प्यारा जीवन
                      रंग लो भँवरों की गुँजन से
                 भँवरों की गुँजन सा रंग लो
                         रंग लो खुद को तुम कोयल सा
                 कोयल सी मीठी बोली से
                          रंग लेना खुद में उनको ....
                  रंग जाओ अब उनके रंग में
                           प्रेम राग के संगम में .....

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पहली मुलाकात

   इंतज़ार था मुझे उस सुहानी सी शाम का जब उस शाम की प्यारी सी छाँव में मैं इंतज़ार करूँगी उनका। वो शाम मुझे अपने आगोश में करने को बेकरार तो बहुत होगी मगर मेरा हुस्न तो किसी और के दीदार की चाहत में तड़प रहा होगा। मेरी आँखों में वो इंतज़ार की प्यास मुझे और भी ज्यादा शर्मसार कर रही होगी।   आज वो शाम आ गई थी जब मैं अपनी ख़ुशी किसी और के साथ बाँटने को राज़ी न थी। मैं ख़ुद में सिमटती सी जा रही थी जैसे कुछ अनकहे से अल्फ़ाज़ मेरे नाज़ुक से मन पर कहर बरसा रहे हों, कुछ कहने को ललकार रहे हों। मगर इन होंठो ने तो एक दूसरे को इस कदर जकड़ रखा था जैसे कि बरसों से मिलन की प्यास में तड़प रहा कोई प्रेमी।   उस मुलाकात का तो कुछ अलग ही अंदाज था जब सितारों से ज़र्द रात उस अंधकार के आंगन में अपना डेरा बसाने जा रही थी तो जुगनू भी पेड़ों पर अपना समां बाँधने को बेकरार थे और रात का अंधेरा अपने साथ कुछ खुशियाँ कुछ नाज़ुक सी खामोशियाँ ला रहा था।  जैसे ही मैं उस शाम की नशीली सी छाँव में उनका साथ पाकर खिलखिला रही थी मानो उतनी ही तेजी से चँदा की चाँदनी चमकती जा रही थी।  ये पहली मुलाकात की वो...

दिखावे में रंगता समाज

सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं .... आज बदलते वक़्त के साथ 15 अगस्त का जायका भी बदल गया है। स्कूलों में लड्डू इमरती और सुहाल कि जगह अब चॉकलेट और टॉफी ने ले ली है। इसे बाज़ारीकरण ही कहेंगे, जब एक मिठाई पसंद देश में कुछ मीठा चॉकलेट खाकर किया जा रहा है। आज समय के साथ राष्ट्रीय पर्व मनाने के तरीकों में भी बदलाव आया है। वो दिन अनमोल थे, जब बच्चे लड्डू पाने के लालच में 15 अगस्त को स्कूल जाना नहीं भूलते थे। जिनको इस दिन का मतलब तक नहीं पता था उनको ये पता होता था आज स्कूल में लड्डू बटेंगे। तब न इतनी टेक्नोलॉजी थी और न ही दिखावे से रंगा बाज़ारीकरण। तब चॉकलेट खाने को शायद ही कभी मिल पाती थी। वो स्कूल में मिलने वाले मोतीचूर के लड्डू खाये हुए अरसा हो जाता था। आज जिन स्कूलों में टॉफी, चॉकलेट बांटने का प्रचलन हो गया है वहाँ के बच्चों के मन पहले से ही चॉकलेट और टॉफी से भरे रहते हैं। जो स्नेह और प्यार मिठाई या लड्डू खाने से मिलता है वो चॉकलेट में कहाँ। ये आज के उभरते सितारे हैं इनकी पसंद को क्या कहें। इनको जिधर ले जायेंगे ये चले जायेंगे। नई पीढ़ी के जितने भी स्कूल अंग्रेजी माध्यम...

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    बात उस समय की है जब मैं अपनी पढाई करने के लिये अपने घर से दूर एक हॉस्टल में आकर रहने लगी थी इससे पहले मैं अपने घर से इस तरह से कभी दूर नही हुई थी , ऐसे में घर की याद आना तो स्वाभाविक था , घर की याद करते हुए मैं अक्सर रोने लगा करती थी तभी मैंने अपने पापा की याद करके कुछ लिखा था जो आज मैं फादर्स डे के अवसर पर उनको सुनना चाहूँगी ..... love u so much papa n happy father's day   पापा जब तुम आओगे और मुझको गले लगाओगे कहीं रो न दूँ मैं तुम्हें देखकर ये सोंच के तुम घबराओगे पापा जब तुम आओगे .... अपनी लाडो को यूँ देखकर  प्यारी मुस्कान तो लाओगे  गर आ भी गये दो आँसू छल से  फिर मुझसे नजर चुराओगे  पापा जब तुम आओगे ..... क्या लाओगे साथ तुम अपने  मेरे लिये कुछ खाने को  बस दे देना एक मुस्कान सुहानी  तुम अपना हाल बताने को  माँ कैसी है ये बतलाना  कैसा है गाँव मेरा  ठीक नहीं होगा फिर पापा  गर मुझसे कुछ छुपाओगे !! पापा जब तुम आओगे                ...