क्या तुमने मुझसे कुछ कहा था माँ
मैं सुन न सकी तेरी वो आवाज
शायद मैं खोई थी कहीं
या फिर बह गई थी कहीं
कि मुझे महसूस तो हुआ
पर मैं सुन न सकी तेरी वो आवाज
क्या तुमने मुझसे कुछ कहा था माँ
थी तो मैं यहीं तेरे पास
पर आँचल में तेरे सोने लगी थी
सपनों की बगिया सजाने लगी थी
कुछ गूँज सी सुनाई दी थी मुझे
पर मैं सुन न सकी तेरी वो आवाज
क्या तुमने मुझसे कुछ कहा था माँ
अगर आँचल की हो खुश्बू तेरे
हर गम को भूल जाती हूँ
बंद कर लूँ जब आँखो को अपनी
तेरी नर्म छाँव ही पाती हूँ
ये तेरा प्यार ही तो था
कि मुझे महसूस तो हुआ
पर मैं सुन न सकी तेरी वो आवाज
क्या तुमने मुझसे कुछ कहा था माँ .......
मैं सुन न सकी तेरी वो आवाज
शायद मैं खोई थी कहीं
या फिर बह गई थी कहीं
कि मुझे महसूस तो हुआ
पर मैं सुन न सकी तेरी वो आवाज
क्या तुमने मुझसे कुछ कहा था माँ
थी तो मैं यहीं तेरे पास
पर आँचल में तेरे सोने लगी थी
सपनों की बगिया सजाने लगी थी
कुछ गूँज सी सुनाई दी थी मुझे
पर मैं सुन न सकी तेरी वो आवाज
क्या तुमने मुझसे कुछ कहा था माँ
अगर आँचल की हो खुश्बू तेरे
हर गम को भूल जाती हूँ
बंद कर लूँ जब आँखो को अपनी
तेरी नर्म छाँव ही पाती हूँ
ये तेरा प्यार ही तो था
कि मुझे महसूस तो हुआ
पर मैं सुन न सकी तेरी वो आवाज
क्या तुमने मुझसे कुछ कहा था माँ .......

👍
ReplyDeleteKudos, true heart feelings, please keep post many more
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