तुम्हारे जज्बे को सलाम
तुम्हारे सपने को सलाम
तुम्हारी बातों में सिमटी
हर आहट को सलाम
सलाम तुम्हारे अपनेपन को
संघर्ष भरे जीवन को
इस जीवन की कश्ती में बहती
दबी हुई उलझन को
हर नारी की कविता हो तुम
हर सपने की वो आस हो
कितना सुन्दर मन भाव तुम्हारा
तुम मन का एक विश्वास हो
वो सोंच रहे थे पड़े जेल में
सब ओर घना अंधेरा है
बस देने से एक साथ तुम्हारे
कुछ देर सही बस थोड़ा सा
शायद एक मिला सवेरा था
उन सूखी पड़ी दीवारों में भी
प्यास जगा दी तुमने
बुझ गया दिया था
जिनके मन का
उससे एक शाम सजा दी तुमने
अब फिर करती हूँ मैं सलाम
उस प्यारी सी सूरत को
उड़ान नई भरकर के जिसने
एक नई सोंच दी हमको ....
इंतज़ार था मुझे उस सुहानी सी शाम का जब उस शाम की प्यारी सी छाँव में मैं इंतज़ार करूँगी उनका। वो शाम मुझे अपने आगोश में करने को बेकरार तो बहुत होगी मगर मेरा हुस्न तो किसी और के दीदार की चाहत में तड़प रहा होगा। मेरी आँखों में वो इंतज़ार की प्यास मुझे और भी ज्यादा शर्मसार कर रही होगी। आज वो शाम आ गई थी जब मैं अपनी ख़ुशी किसी और के साथ बाँटने को राज़ी न थी। मैं ख़ुद में सिमटती सी जा रही थी जैसे कुछ अनकहे से अल्फ़ाज़ मेरे नाज़ुक से मन पर कहर बरसा रहे हों, कुछ कहने को ललकार रहे हों। मगर इन होंठो ने तो एक दूसरे को इस कदर जकड़ रखा था जैसे कि बरसों से मिलन की प्यास में तड़प रहा कोई प्रेमी। उस मुलाकात का तो कुछ अलग ही अंदाज था जब सितारों से ज़र्द रात उस अंधकार के आंगन में अपना डेरा बसाने जा रही थी तो जुगनू भी पेड़ों पर अपना समां बाँधने को बेकरार थे और रात का अंधेरा अपने साथ कुछ खुशियाँ कुछ नाज़ुक सी खामोशियाँ ला रहा था। जैसे ही मैं उस शाम की नशीली सी छाँव में उनका साथ पाकर खिलखिला रही थी मानो उतनी ही तेजी से चँदा की चाँदनी चमकती जा रही थी। ये पहली मुलाकात की वो...
Fantastic Vanya ......
ReplyDeleteवान्या, इसे आज देखा और पढ़ा. इन भावों को इस खूबसूरती के साथ व्यक्त करने के लिए आभारी हूं. इसे पढ़कर बेहद खुशी हुई.
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