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प्रदुम्न की याद में ...... कुछ मेरी कलम से


           कितना तड़प रही होगी वो माँ
           जिसका लाल उससे बिछड़ गया
           अँखियों के बंद झरोखों से
           अंसुओं की धार बहा गया
           
                       पागल सी वो तड़प रही
                       उसका लाल उसे मिल जाये कहीं
                                        मगर अफसोस बेरहम दुनिया का
                       या कुदरत कोई खेल खेल गया
                       जो लाल उसी का उससे लेकर
                       अपना कहकर कोई छीन गया
                       मेरा लाल मुझसे बिछड़ गया
     
          प्यारी प्यारी उसकी बोली
          ममता में आह जगाती है
          कानों में गूंज रही आवाज
          माँ माँ कहकर रुक जाती है
          आखिर क्या कसूर था मेरा
          जो मेरा लाल मुझसे जुदा किया
          ममता की हाय सताएगी
          मेरा सब कुछ तुमने छीन लिया
          हाय मेरा लाल मुझसे बिछड़ गया
  
                         अपनी सूनी गोदी लेकर
                         अब खुद को क्या समझाये वो
                         क्या बीत रही है उस माँ पर
                         कैसे किसको बतलाये वो
                         आसमान के तारों में
                         वो रोज खड़ी निहारती है
                         शायद आ जाये लाल मेरा
                         बस इतना कहकर रुक जाती है
               
               
 

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पापा की याद

    बात उस समय की है जब मैं अपनी पढाई करने के लिये अपने घर से दूर एक हॉस्टल में आकर रहने लगी थी इससे पहले मैं अपने घर से इस तरह से कभी दूर नही हुई थी , ऐसे में घर की याद आना तो स्वाभाविक था , घर की याद करते हुए मैं अक्सर रोने लगा करती थी तभी मैंने अपने पापा की याद करके कुछ लिखा था जो आज मैं फादर्स डे के अवसर पर उनको सुनना चाहूँगी ..... love u so much papa n happy father's day   पापा जब तुम आओगे और मुझको गले लगाओगे कहीं रो न दूँ मैं तुम्हें देखकर ये सोंच के तुम घबराओगे पापा जब तुम आओगे .... अपनी लाडो को यूँ देखकर  प्यारी मुस्कान तो लाओगे  गर आ भी गये दो आँसू छल से  फिर मुझसे नजर चुराओगे  पापा जब तुम आओगे ..... क्या लाओगे साथ तुम अपने  मेरे लिये कुछ खाने को  बस दे देना एक मुस्कान सुहानी  तुम अपना हाल बताने को  माँ कैसी है ये बतलाना  कैसा है गाँव मेरा  ठीक नहीं होगा फिर पापा  गर मुझसे कुछ छुपाओगे !! पापा जब तुम आओगे                ...

पहली मुलाकात

   इंतज़ार था मुझे उस सुहानी सी शाम का जब उस शाम की प्यारी सी छाँव में मैं इंतज़ार करूँगी उनका। वो शाम मुझे अपने आगोश में करने को बेकरार तो बहुत होगी मगर मेरा हुस्न तो किसी और के दीदार की चाहत में तड़प रहा होगा। मेरी आँखों में वो इंतज़ार की प्यास मुझे और भी ज्यादा शर्मसार कर रही होगी।   आज वो शाम आ गई थी जब मैं अपनी ख़ुशी किसी और के साथ बाँटने को राज़ी न थी। मैं ख़ुद में सिमटती सी जा रही थी जैसे कुछ अनकहे से अल्फ़ाज़ मेरे नाज़ुक से मन पर कहर बरसा रहे हों, कुछ कहने को ललकार रहे हों। मगर इन होंठो ने तो एक दूसरे को इस कदर जकड़ रखा था जैसे कि बरसों से मिलन की प्यास में तड़प रहा कोई प्रेमी।   उस मुलाकात का तो कुछ अलग ही अंदाज था जब सितारों से ज़र्द रात उस अंधकार के आंगन में अपना डेरा बसाने जा रही थी तो जुगनू भी पेड़ों पर अपना समां बाँधने को बेकरार थे और रात का अंधेरा अपने साथ कुछ खुशियाँ कुछ नाज़ुक सी खामोशियाँ ला रहा था।  जैसे ही मैं उस शाम की नशीली सी छाँव में उनका साथ पाकर खिलखिला रही थी मानो उतनी ही तेजी से चँदा की चाँदनी चमकती जा रही थी।  ये पहली मुलाकात की वो...

"जब तुम याद आये"

       वो शीतल सी लहर की आवाज ऐसे ढक रही थी मुझको जैसे खुले आसमां में बरसती मीठी सी ओस, वो गाने की धीमी सी धुन कुछ कह रही थी मुझसे, जैसे कोयल की मीठी बोली में कोई अलपती सी राग हो। वो मेरे मन का कुछ ना बोलना, वो मेरी आँखो में कुछ सपनों का होना। ये सब मेरे जज़्बातों की वो शाम थी जो मुझपर कहर ढा रही थी। खुदपर काबू पाने को ललकार रही थी। मगर मेरी वो मासूमियत तो मुझपर फ़िदा हो गयी थी जो आज इस ढलती हुई शाम के साथ मेरा बहुत कुछ ले जाने को तैयार थी।        इस अकेलेपन की चादर में मैं लिपटती सी जा रही थी, वो चादर की नर्म सी परत बार-बार ढक रही थी मुझको, मेरे सपनो को जगा रही थी और मेरी खामोशी को और भी ज्यादा खामोश करने की कश्मकश में लगी हुई थी। मगर वो बेईमान रात आज और ज्यादा बे ईमान हो गई थी, मानों कुछ ही अल्फाजों में सब कुछ लूट लेगी मेरा। मगर मेरी तन्हाई उस बेईमान रात पर फ़िदा हो गई और मुझको अपने आगोश में करके उस सफर पर चल दी थी जहां पर न मंजिल थी न किनारा। बस एक उम्मीद थी उस रात में आने वाले उस कहर की, मगर अब तो कहर ने भी बरसाना छोड़ दिया था...