Skip to main content

शब्द से बदलती दुनिया


           दोस्तों शब्द क्या होते हैं ? कितना महत्व होता है इन शब्दों का हमारे जीवन में, क्या कभी कुछ सोचा है आपने।
        जब हम अपने विचार किसी दूसरे तक पहुंचाते हैं तो उसमें हम शब्दों का सहारा लेते हैं और यही शब्द मिलकर एक वाक्य बना देते हैं। जिसको हम 'बात' कह सकते हैं, हमने तुमसे ये बात कही या तुमने हमसे वो बात कही, पर ये बात आई कहाँ से, ये बात बनी कहाँ से ? ये बात बनती है कई शब्दों को मिलाकर ।
        कभी किसी बात को कहने के लिए हमें अनेक शब्दों को जोड़ना पड़ता है और कभी हम एक ही शब्द में पूरी बात कह जाते हैं । जिसके आगे शायद हमें और कुछ बोलने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। हमारे जीवन में शब्दों का उतना ही महत्व है जितना की भाव का। कभी बिना शब्द के ही किसी दूसरे से हम अपने भाव व्यक्त कर देते हैं और कभी हम बिना भाव के ही कोई शब्द कह देते हैं ।
     सच तो ये है हमको अपने भाव को व्यक्त करने के लिए शब्दों का सहारा लेना पड़ता है, शब्द के बिना भाव अधूरा होता है वहीं भाव के बिना शब्द भी अधूरा सा लगता है । अपने दो रूपों में बंधा ये शब्द कभी हमें बहुत मीठा लगता है तो कभी हमें बहुत कड़वा लगता है । मीठा शब्द वही जो हमें आनंद की सैर कराता है तो वहीं कड़वा शब्द हमें क्रोध और निराशा की सैया में ले जाकर डुबो देता है।
             कभी किसी अंजान द्वारा कहे गए कुछ शब्द भी अपने से लगते हैं तो कभी किसी अपने के द्वारा कहे गए वही शब्द दिल को कचोटने लगते हैं। शब्द एक ऐसा रूप है जो छोटा होते हुये भी भाव से बहुत बड़ा हो जाता है। कभी शब्दों पर ना जाकर हम भाव को समझना चाहते हैं मगर कभी ये भाव हमें शब्दों पर सोचने को मजबूर कर देते हैं। एक शब्द हाँ दोस्तों ... एक शब्द बहुत कुछ बना सकता है और बहुत कुछ बिगाड़ भी सकता है।
   
      कभी वो कहतें हैं मुझसे .... अरे ! तुमने तो मेरे बस वो शब्द सुने हैं मेरे अंदर के भाव तुम क्या जानो ? तुमने तो बस वो शब्द सुने जो मेरे पागल मन ने तुमसे कह दिये। मगर तुमने उन शब्दों में छिपी उस प्यार की गहराई को समझा ही नहीं , समझना तो दूर की बात है तुम कुछ सोचना ही नहीं चाहती उन शब्दों के बारे में ।
पर मैं क्या करूं, मुझे तो वही सुनाई दिया जो तुमने अपने इस मुख से मुझसे कहा। गुस्से से कहा या प्यार से कहा फर्क नहीं पड़ता है, मगर उसमें शब्द क्या थे ? बहुत फर्क पड़ता है उन शब्दों का मेरे ऊपर ।
वो शब्द सुनने के बाद उनमें वो भाव ढूँढने की मेरी लालसा ही समाप्त हो गयी । जितना कुछ कहना था तुमको मुझसे वो तेरे शब्दों ने कह दिया ।
      अब शब्दों का क्या कहें दोस्तों कभी एक ही शब्द दो दिलों में प्यार जगा देता है तो कभी एक ही शब्द दो दिलों में तकरार ला देता है । कभी एक ही शब्द दुनिया की कहानी कह देता है तो कभी कोई कहानी कहने को दिल बहुत बेकरार होता है मगर शब्द ही नहीं मिलते ।
ऐसा अक्सर तभी होता है जब इंसान अत्यंत प्रसन्न होता है किसी भी बात को लेकर, तो उसके पास शब्द ही नहीं होते हैं जो वह अपनी प्रसन्नता को बयाँ कर सके। कभी कोई ऐसा कहता है कि भाई मैं खुश तो बहुत हूँ तुम्हारे इस काम को देखकर, मगर मेरे पास शब्द ही नहीं हैं कि मैं तुमसे कुछ कह पाऊँ, मेरे पास शब्द कम पड़ रहे हैं दोस्त। दोस्त की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता, वह भी सोचता है कि मैं इतना खुशनसीब हो गया कि आज मेरे लिए इसके पास शब्द ही नहीं हैं क्यूँकि मैंने इतना अच्छा काम जो किया है कि ये मुझे कोई शब्द न देकर अपने भावों से मुझे अभिव्यक्त कर रहा है।
        वहीं दूसरी ओर शब्दों का एक यह रूप भी होता है कि जब कोई व्यक्ति अत्यंत बुरा काम करता है तभी दूसरा व्यक्ति उस इंसान से इतना अधिक क्रोधित हो जाता है और कहता है कि दोस्त ... तूने ऐसा काम किया है कि मेरे पास तेरे लिए कोई शब्द नहीं है कि मैं तुझसे तेरे बारे में कुछ भी कहूँ।
    
       आज बुराई भी शब्द से जीत गई, कभी ख़ुशी जीत जाती है तो कभी बुराई जीत जाती है, पर शब्दों का क्या है वे तो अजड़ रहते हैं यदि इन्हीं शब्दों को भाव से भर दिया जाये तो वे मन को रौशनी से भर देते हैं।
     

Comments

Popular posts from this blog

पहली मुलाकात

   इंतज़ार था मुझे उस सुहानी सी शाम का जब उस शाम की प्यारी सी छाँव में मैं इंतज़ार करूँगी उनका। वो शाम मुझे अपने आगोश में करने को बेकरार तो बहुत होगी मगर मेरा हुस्न तो किसी और के दीदार की चाहत में तड़प रहा होगा। मेरी आँखों में वो इंतज़ार की प्यास मुझे और भी ज्यादा शर्मसार कर रही होगी।   आज वो शाम आ गई थी जब मैं अपनी ख़ुशी किसी और के साथ बाँटने को राज़ी न थी। मैं ख़ुद में सिमटती सी जा रही थी जैसे कुछ अनकहे से अल्फ़ाज़ मेरे नाज़ुक से मन पर कहर बरसा रहे हों, कुछ कहने को ललकार रहे हों। मगर इन होंठो ने तो एक दूसरे को इस कदर जकड़ रखा था जैसे कि बरसों से मिलन की प्यास में तड़प रहा कोई प्रेमी।   उस मुलाकात का तो कुछ अलग ही अंदाज था जब सितारों से ज़र्द रात उस अंधकार के आंगन में अपना डेरा बसाने जा रही थी तो जुगनू भी पेड़ों पर अपना समां बाँधने को बेकरार थे और रात का अंधेरा अपने साथ कुछ खुशियाँ कुछ नाज़ुक सी खामोशियाँ ला रहा था।  जैसे ही मैं उस शाम की नशीली सी छाँव में उनका साथ पाकर खिलखिला रही थी मानो उतनी ही तेजी से चँदा की चाँदनी चमकती जा रही थी।  ये पहली मुलाकात की वो...

पापा की याद

    बात उस समय की है जब मैं अपनी पढाई करने के लिये अपने घर से दूर एक हॉस्टल में आकर रहने लगी थी इससे पहले मैं अपने घर से इस तरह से कभी दूर नही हुई थी , ऐसे में घर की याद आना तो स्वाभाविक था , घर की याद करते हुए मैं अक्सर रोने लगा करती थी तभी मैंने अपने पापा की याद करके कुछ लिखा था जो आज मैं फादर्स डे के अवसर पर उनको सुनना चाहूँगी ..... love u so much papa n happy father's day   पापा जब तुम आओगे और मुझको गले लगाओगे कहीं रो न दूँ मैं तुम्हें देखकर ये सोंच के तुम घबराओगे पापा जब तुम आओगे .... अपनी लाडो को यूँ देखकर  प्यारी मुस्कान तो लाओगे  गर आ भी गये दो आँसू छल से  फिर मुझसे नजर चुराओगे  पापा जब तुम आओगे ..... क्या लाओगे साथ तुम अपने  मेरे लिये कुछ खाने को  बस दे देना एक मुस्कान सुहानी  तुम अपना हाल बताने को  माँ कैसी है ये बतलाना  कैसा है गाँव मेरा  ठीक नहीं होगा फिर पापा  गर मुझसे कुछ छुपाओगे !! पापा जब तुम आओगे                ...

अनोखी देशभक्ति

आज़ादी की 72वीं वर्षगांठ थी। सुबह से ही चारों ओर चहल पहल थी। स्कूल के बच्चे स्कूल जा रहे थे मगर वो पीठ पर स्कूल का बैग लादकर नहीं अपने हाथों में एक झंडा लिए थे। ये झंडा उनका देशप्रेम दर्शाता था। सारा शहर दुल्हन सा सजा था जिसका नज़ारा रात में ही देखते बनता था। ऑफिस जाने वाले निकल रहे थे। सड़कों पर रोज़ से ज्यादा रौनक थी। घरों में बैठे बुजुर्ग टीवी पर मोदी जी का भाषण सुनने में व्यस्त थे तो कोई अपने बच्चे के स्कूल उसका डांस देखने जा रहा था। दूसरी ओर सोशल मीडिया भी देशभक्ति से भर चुका था। हर दिन से अलग आज का दिन था। मन में ढेरों खुशियाँ थीं मगर सिर्फ एक दिन की। दूसरा दिन होते ही सब पहले जैसा हो जाता।  एक दिन के लिए सबकी देशभक्ति जाग गई थी। सवाल तो बस मन में ये उठ रहा था ये देशभक्ति महज एक दिन की क्यूँ? उसके बाद, उसके बाद ये देश किसी और का हो जाता है क्या? या फिर तुम ही इसके वासी नहीं रहते? तब किसी को परवाह नहीं रहती देश मे क्या हो रहा है? कोई सीख याद नहीं आती, कचरा न फैलायें, महिलाओं पर अत्याचार न करें, सबको अपनी माँ बहन समझें। ये सब महज एक दिन के लिए क्यूँ याद रहता है उसके बाद हम...