सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं ....
आज बदलते वक़्त के साथ 15 अगस्त का जायका भी बदल गया है। स्कूलों में लड्डू इमरती और सुहाल कि जगह अब चॉकलेट और टॉफी ने ले ली है। इसे बाज़ारीकरण ही कहेंगे, जब एक मिठाई पसंद देश में कुछ मीठा चॉकलेट खाकर किया जा रहा है। आज समय के साथ राष्ट्रीय पर्व मनाने के तरीकों में भी बदलाव आया है। वो दिन अनमोल थे, जब बच्चे लड्डू पाने के लालच में 15 अगस्त को स्कूल जाना नहीं भूलते थे। जिनको इस दिन का मतलब तक नहीं पता था उनको ये पता होता था आज स्कूल में लड्डू बटेंगे। तब न इतनी टेक्नोलॉजी थी और न ही दिखावे से रंगा बाज़ारीकरण।
तब चॉकलेट खाने को शायद ही कभी मिल पाती थी। वो स्कूल में मिलने वाले मोतीचूर के लड्डू खाये हुए अरसा हो जाता था। आज जिन स्कूलों में टॉफी, चॉकलेट बांटने का प्रचलन हो गया है वहाँ के बच्चों के मन पहले से ही चॉकलेट और टॉफी से भरे रहते हैं। जो स्नेह और प्यार मिठाई या लड्डू खाने से मिलता है वो चॉकलेट में कहाँ।
ये आज के उभरते सितारे हैं इनकी पसंद को क्या कहें। इनको जिधर ले जायेंगे ये चले जायेंगे। नई पीढ़ी के जितने भी स्कूल अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देते हैं वो अपनी संस्कृति पर जोर न देकर आधुनिकीकरण पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। समय कितना भी आगे क्यूँ न बढ़ जाये, हमको अपनी संस्कृति और सभ्यता को बरकरार रखना होगा। समय के साथ सब बदल रहा है बस देखना ये है इस आधुनिकीकरण में हम खुद को उलझा लेते हैं या फिर इसमें रंगते समाज को दूर से ही देखते हैं।
आज बदलते वक़्त के साथ 15 अगस्त का जायका भी बदल गया है। स्कूलों में लड्डू इमरती और सुहाल कि जगह अब चॉकलेट और टॉफी ने ले ली है। इसे बाज़ारीकरण ही कहेंगे, जब एक मिठाई पसंद देश में कुछ मीठा चॉकलेट खाकर किया जा रहा है। आज समय के साथ राष्ट्रीय पर्व मनाने के तरीकों में भी बदलाव आया है। वो दिन अनमोल थे, जब बच्चे लड्डू पाने के लालच में 15 अगस्त को स्कूल जाना नहीं भूलते थे। जिनको इस दिन का मतलब तक नहीं पता था उनको ये पता होता था आज स्कूल में लड्डू बटेंगे। तब न इतनी टेक्नोलॉजी थी और न ही दिखावे से रंगा बाज़ारीकरण।
तब चॉकलेट खाने को शायद ही कभी मिल पाती थी। वो स्कूल में मिलने वाले मोतीचूर के लड्डू खाये हुए अरसा हो जाता था। आज जिन स्कूलों में टॉफी, चॉकलेट बांटने का प्रचलन हो गया है वहाँ के बच्चों के मन पहले से ही चॉकलेट और टॉफी से भरे रहते हैं। जो स्नेह और प्यार मिठाई या लड्डू खाने से मिलता है वो चॉकलेट में कहाँ।
ये आज के उभरते सितारे हैं इनकी पसंद को क्या कहें। इनको जिधर ले जायेंगे ये चले जायेंगे। नई पीढ़ी के जितने भी स्कूल अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देते हैं वो अपनी संस्कृति पर जोर न देकर आधुनिकीकरण पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। समय कितना भी आगे क्यूँ न बढ़ जाये, हमको अपनी संस्कृति और सभ्यता को बरकरार रखना होगा। समय के साथ सब बदल रहा है बस देखना ये है इस आधुनिकीकरण में हम खुद को उलझा लेते हैं या फिर इसमें रंगते समाज को दूर से ही देखते हैं।

बहुत सुंदर बहना ✌
ReplyDeleteThank u dear😘
DeleteNice.
ReplyDeleteThank u ...
DeleteGajab....👌👍
ReplyDeleteThank u ...
ReplyDeletebahut khoob
ReplyDeleteThanks
DeleteAwesome dear
ReplyDeleteThanks pranjal🙂
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