समाज में दरिंदगी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। हर रोज एक नई लड़की का बलात्कार हो रहा है। दुनिया में इतनी गंदगी फैल चुकी है कि अब भाई बहन के रिश्ते को भी शक ने घेर लिया है। क्या भाई बहन का रिश्ता अब सिर्फ नाममात्र का रिश्ता रह गया है? सवाल थोड़ा मुश्किल है पर जवाब ढूंढना होगा।
हर रोज़ एक नया भाई एक नई बहन को आवारा लड़की समझकर अपनी प्यास बुझा लेता है। इसमें वो अकेला ही नहीं साथ में और बहनों के भाइयों को भी शामिल कर लेता है। तुम्हारी बहन बहन है। किसी और की बहन ... वो क्या है।असल में वो तुम्हारी बहन के जैसी ही किसी भाई की बहन होती है। हाँ उसी बहन के जैसी जिससे तुम राखी बंधवाते हो। जिसको तुम वचन देते हो तुम जीवनपर्यंत उसकी रक्षा करोगे। हर मुश्किल में उसका साथ दोगे। वो तुम्हारी न सही किसी और की तो बहन है। अरे बहन जैसा ही समझकर बख्श दो उसे। रक्षा का वचन देते हो कैसा है तुम्हारा भाई का ये रक्षावचन। क्या ये रक्षावचन महज़ एक दिन का मेहमान होता है। या सिर्फ ये दिखावा है। इतने उत्साह से रक्षाबंधन का त्यौहार मनाते हो और कोई बहन न हो तो शोक मनाते हो।
सही मायनों में देखा जाये तो यही मालूम होता है कि ये रक्षावचन जैसी बातें पुरानी हो चुकी हैं जो पौराणिक कथाओं में सुनने को मिल जाती हैं। अब न तो कोई रक्षा का वचन देना चाहता है और न ही निभाना चाहता है। जिस दिन दूसरे की बहन को अपनी बहन समझकर उसकी रक्षा करोगे। उस दिन आजाद कर दोगे उसे अपनी गंदी नज़रों से। उस दिन आज़ाद कर दोगे उसे जिंदगी जीने के लिये खुलकर हंसने के लिए सभी बंधनों से मुक्त होकर खुली हवा में सांस लेने के लिए। उस दिन तुम सही मायनों में अपनी बहन को दिया हुआ रक्षावचन निभा पाओगे।
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